शुक्र जंतु बढाने का असरदार उपाय

शुक्र जंतु बढाने का असरदार उपाय 

शुक्र जंतु की कमी से ३० % पुरुषोंमें वंध्यत्व देखा गया है इस वजह से न जाने कितने पतिपत्नी औलाद के सुखसे वंचित रहते हे | इसलिए वैद्य मिलिंद कुमावतजी द्वारा कुछ अनुभूत प्रयोग यहाँ वर्णन किये गए है | इनके प्रयोग से हजारो लोगो को फायदा हुआ है


 शुक्र जंतु
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कैसे होती है शुक्रधातु की उत्पत्ति 

शरीर में सात प्रकार के धातु होते है इन रस रक्तादि धातुओं का पोषण आहार रस से होता है | हम जैसा आहार लेते है उसप्रकार धातुओं का पोषण होता है | उष्ण आहार लेने पर धातुओं में ऊष्मा बढ़ता है और पोषक आहार लेने पर धातु पुष्ट होते है | 
शरीर में रस रक्त ,मांस ,मेद ,अस्थि ,मज्जा , शुक्र यह सात धातु होते है | पहले धातु का पोषण होने के बाद जो रस बचता है उससे अगले धातु का पोषण होता है |   
इस प्रक्रिया की कारण  अगले धातुओंके पोषक रस से शुक्र धातु की उत्पत्ति होती है इसका मतलब शुक्र धातु सभी धातुओंका सार है |





शुक्र अल्पता के कारण 

  1. ऊष्मा की जगहा पे काम करना 
  2. अत्यधिक उष्ण आहार सेवन करना 
  3. हस्तमैथुन करना 
  4. कामोत्तेजक दृश्य देखना 
  5. कुपोषित आहार लेना 
  6. अतिमात्रा में व्यसन करना 
  7. अधिक श्रम करना 
  8. अधिक प्रवास करना 
  9. संक्रमित आहार लेना 
  10. जननांगो की सफाई न रखना 
  11. मूत्र में संक्रमण होना 

 शुक्र बढ़ने के उपाय 

  1. आहार विहारज उपाय :- आहार विहारज उपाय का मतलब है रोजकी दिनचर्या आहार विहार में  खानपान व्यायाम इत्यादि का समावेश होता है अनुचित आहार विहार के कारण शुक्र धातु में कमी आ आ सकती है | आजकल के खानपान की वजह से मनुष्य शरीर की संरचना में अव्यवस्था देखि गयी है | फास्टफूड , होटल का खाना ,बासी खाना , विरुद्ध आहार की वजह से शरीर का पाचन तंत्र बिगड़ जाता है उस वजह से शरीर में बेवजह ऊष्मा की निर्मिति होती है और इस ऊष्मा के कारण शरीर में धातुओ पे असर होता है | इसी कारण शरीर में पोषक तत्व न मिलाने के कारण उत्तरोत्तर धातु पोषण थम जाता है | और शुक्र धातु सभी धातुओं का सार होने के कारण उसका भी निर्माण अच्छेसे नहीं होता | 
               इसलिए  उपाय स्वरुप आहार विहार के नियम निचे बताये गए अनुसार 

  • आहार में शुद्ध, पौष्टिक आहार का चयन करे 
  • बासी खाना न खाये 
  • होटल का खाना , फास्टफूड , तली हुई चीजे जैसे भजिया , समोसा , वडा इत्यादि का सेवन टाले 
  • गेंहू की रोटी की जगह ज्वार की रोटी का उपयोग करना उचित है 
  • आहार में रासायनिक खादों से निर्मित सब्जियों का उपयोग न करे 
  • पूर्ण तरहसे पेट जबतक खली नहीं होता , भोजन पच नहीं जाता तबतक अगला भोजन न करे 
  • रात्री में देर तक जागना टाले हो सके तो सुबह जल्दी उठे 
  • रात्री में देर से भोजन न करे 
  • रात का खाना सुबह न खाए , फ्रीज में रखा भोजन फिरसे गरम करके न खाए 
  • नियमित व्यायाम ,योगाभ्यास इत्यादि का नियम रखे 
  • अधिक मात्रा में थोड़ी थोड़ी बात के लिए अंग्रेजी दवाई न ले 
  • मानसिक आरोग्य के लिए ध्यान धारणा का अभ्यास करे 
  • अधिक मात्रा में श्रम करना, बाते करना, सफर करना , सम्भोग करना टाले 
  • बीड़ी, तम्बाकू ,सिगरेट, दारू इत्यादि का सेवन करना टाले 
  • चिड़चिड़ापन ,क्रोध करना , झगड़ा करना , मन को दुखी करना हानिकारक है 
  • अधिक मात्रा में रसायन युक्त आहार जैसे प्रिज़र्वेटिव विनेगर , सॉस इत्यादि मिला हुआ खाना न खाए 

    २.औषधीय उपाय 


शुक्र की कमी के लिए बाजार में बहुत सारी दवाइया उपलब्ध है पर इसलिए योग्य वैद्योंसे नाड़ी परीक्षा करके अपने लिए योग्य दवा का चयन करे और वैद्योकि सलाह से दवाई ले 
मुख्यतः इसलिए जो दवाई दी जाती है वह शरीर को पूर्णतः पंचकर्म के द्वारा शुद्ध करके दी जाये तो इस दवा का योग्य असर देखने को मिलता है अशुद्ध शरीर में दवाई लेकर विपरीत परिणाम हो सकता है 
नकली वैद्यो के द्वारा विभिन्न प्रकारके भस्मो को एकत्रित करके महंगे दाम में बेचा जाता है और इसके कारण शरीर पर दुष्प्रभाव देखने को मिलता है 

वैद्य मिलिंद कुमावत जी द्वारा सूचित कुछ प्रयोग इस प्रकार है 
  • गुनगुना दूध १ कप + देसी घी २ चमच + मिश्री १ चमच यह मात्रा एक बार सुबह ---एक बार रात्री में सोते समय ले 
  • वंग भस्म १२५ mg की मात्रा में २ बार खली पेट घी के सात ले 
  • इमली के बीज को भून कर छिलके उतारकर सफ़ेद भाग का चूर्ण बनाकर २ --- २ ग्राम की मात्रा में दूध के साथ ले 
  • अश्वगंधा १ ग्राम + यष्टिमधु १ ग्राम + कौच बीज चूर्ण १ ग्राम मिलकर यह मात्रा दूध में उबालकर २ बार ले 
  • वैद्य मिलिंद कुमावत जी द्वारा अनुभूत विशिष्ट प्रयोग 
           बरगद के पेड़ की जटाओ को निचेसे १ फिट के नाप से तोड़कर लाये १ किलो तक लाए इसको ८ किलो पानी में उबालकर २ किलो तक रखे बाद में इसे छान कर इसमें २ किलो शक्कर मिलाये और एक निम्बू का रस डाले जबतक एक तार वाली चासनी जैसा न बने तबतक गरम करे और इसको साफ बोटल में छान कर भरले  और इसका उपयोग १० ग्राम की मात्रा को १ कप पानी या दूध में घोलकर सुबह शाम खालीपेट ले 
इस प्रयोग से हमने हजारो लोगो में फायदा होते हुए देखा हे इस प्रयोग से न जाने कितने घरो में संतान का सुख प्राप्त हुआ है इस प्रयोग के फायदे स्वरुप वीर्य की मात्रा बढ़ना, चहरे पे चमक आना, कमजोरी दूर होना, आखो की रोशनी बढ़ना , खून में से गरमी कम होना , मुंह में छाले , मुंहासे कम होते है , गरमी के कारण  होने वाले त्वचा विकार भी इससे कम होते है इस प्रकार कई प्रकारके फायदे हमने अनुभूत किये है 
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