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फल - सब्जियो से रोग निवारण के घरेलु नुस्खे / Health With Fruits And Vegetables

फल - सब्जियो से रोग निवारण के घरेलु नुस्खे 

फलों व सब्जियों में प्राकृतिक रूप से विटामिन व खनिज तत्त्व रहते है।  फल व सब्जियों के सेवन से विभिन्न रोग - विकारों को सरलता से नष्ट किया जाता है।  नगरों से दूर गावो में औषधियाँ सरलता से उपलब्ध नहीं हो पाती है।  ऐसे में फल - सब्जियों से रोग - विकारो को नष्ट किया जा सकता है।  

फल - सब्जियो से रोग निवारण के घरेलु नुस्खे / Health With Fruits And Vegetables


आम - 

  • आम की गुठली के भीतर की गिरी और हरड़ को बराबर मात्रा में दूध के साथ सिलपर पीसकर मस्तक पर लेप करने से सिरदर्द नष्ट होता है।  
  • आमके ६० ग्राम रस में २० ग्राम दही और ५ ग्राम अदरक का रस मिलाकर दिन में दो तीन बार सेवन करने से अतिसार की विकृति नष्ट होती है।  
  • आम की गुठली के भीतर की गिरी  को सूखाकर बारीक चूर्ण बनाकर जल के साथ सेवन करने से स्त्रियों का प्रदर रोग दूर होता है।
  • आम की गुठली के भीतर की गिरी को कूटकर चूर्ण बनाकर मधु मिलाकर सेवन करने से श्वास रोग व  खांसी का प्रकोप मिटता होता है।
  •  आम वृक्ष पर लगे बोर को एरण्डे के तेल में देर तक पकाये, जब बौर जल जाए तो तेल छानकर बूंद बूंद कान में डालने से कान दर्द ठीक होता है।  
  • बीजू आम चूसकर ऊपर से दूध पिने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती है और रक्ताल्पता नष्ट होती है।  
  • आम के रस में मधु मिलकर सेवन करने से प्लीहा वृद्धि की विकृति मिटती होती है।  
  • आम का रस २०० ग्राम , अदरक का रस १० ग्राम और दूध २५० ग्राम मिलाकर पिने से शारीरिक व् मानसिक निर्बलता नष्ट होती है।  स्मरण शक्ति तीव्र होती है।  

अनार 

  • अनार का ताजा रस १५० ग्राम मात्रा में सेवन करने से ग्रीष्मऋतु की उष्णता दूर होती है।  \
  • अनार के दाने खाने से व रस पीने से गर्भावस्था में उत्पन्न वमन विकृति दूर होती है। 
  • अनार के १०० ग्राम रस में कालीमिर्च का चूर्ण और सेंधानमक मिलाकर सेवन करने से उदार शूल का शमन होता है।  
  • अनार वृक्ष की छाल,कमलगट्टे की छाल, महुए की छाल, लोध्र और अनार के दाने पीसकर शरीर पर मलने और पांच मिनट बाद स्नान करने से शरीर की दुर्गन्ध मिटती है। 
  • ग्रीष्म ऋतु में बच्चो की नाक से रक्त स्राव ( नकसीर ) होने पर अनार का रस पिलाने से तुरंत लाभ होता है।  
  • अनार के छिलके को थोड़ी-सी हल्दी के साथ सिल पर पीसकर चेहरे पर लेप करने से झाइयां और मुहासे ठीक होते है।  चेहरे का आकर्षण बढ़ता है।  
  • १०० ग्राम अनार का रस प्रतिदिन सेवन करने से कुछ सत्पाह में ह्रदय की निर्बलता नष्ट होती है।  आमाशय, यकृत और आंतो के विकार नष्ट होते है।  

जामुन 

  • जामुन की गुठली, और आम की गुठली के भीतर की गिरी को कूटकर बारीक चूर्ण बनाए।  ६ ग्राम चूर्ण तक मट्ठे के साथ, दिन में दो-तीन बार सेवन करने से प्रवाहिका ( पेचिश ) रोग से आराम होता है।  
  • जामुन वृक्ष की छाल को थोड़ा सा कूटकर, जल में देर तक उबालकर क्वाथ ( काढ़ा ) बनाकर, छानकर मधु मिलाकर सुबह - शाम पिने से स्त्रियों का प्रदर रोग ठीक होता है।  
  • जामुन के पत्तो के १० ग्राम रस जल मिल में मिलाकर पिलाने से अफीम का प्रकोप मिट जाता है।  
  • जामुन की गुठलियों का तेल हल्का सा गर्म करके बून्द बून्द कान में डालने से कान का स्राव व शूल से आराम होता है।  
  • जामुन और सेंधानमक मिलाकर खाने से अर्श रोग में रक्त स्राव की विकृति नष्ट होती है।  
  • जामुन खाने से मुंह के छाले दूर हो जाते है।  
  • ग्रीष्म ऋतु में जामुन का शर्बत शीतल जल मिलाकर सेवन करने से उष्णता नष्ट होती है।  वमन और अतिसार की विकृति दूर होती है। 
  • जामुन के ताजे पत्तों का रस और करेले के पत्तो का रस ५-५ ग्राम मात्रा में मिलाकर उसमे विजयसार का चूर्ण ३ ग्राम मात्रा में मिलाकर सेवन करने से मधुमेह रोग में आराम मिलता है। 

अंगूर 

  • अंगूरों के सेवन से ग्रीष्म ऋतु में उष्णता की जलन नष्ट होती है।  प्यास की अधिकता नष्ट होती है और शरीर की थकावट का निवारण होता है।  
  • प्रतिदिन अंगूर खाने से शारीरिक निर्बलता नष्ट होती है और शारीरिक सुंदरता विकसित होती है। 
  • अंगूरों का शर्बत शीतल जल मिलाकर, दिन में दो बार पीने से ग्रीष्म ऋतु में मूत्र की जलन व अवरोध की विकृति दूर होती है।  
  • अण्डकोषों के शोथ ( सूजन ) होने पर अंगूरों के ताजे पत्तो पर तेल लगाकर, हल्का-सा सेंक कर बांधने पर शीघ्र शोथ ठीक होता है।  
  • नन्हे शिशु के दांत निकलने पर उन्हें अंगूरों का ५-५ ग्राम सेवन कराने से दांत सुगमता से निकलते है।  
  • प्रतिदिन अंगूरों का सेवन करने से कोष्ठबद्धता ( कब्ज ) की विकृति मिटती है और अर्श रोग ( बवासीर ) नष्ट होता है।  
  • प्रतिदिन अंगूर खाने से ह्रदय को बहुत शक्ति मिलती है।  

अमरूद 

  • कच्चे अमरूद को जल के छींटे मारकर, सिलपर घिसकर मस्तक पर लेप करने से आधा सीसी का दर्द दूर होता है।  
  • अमरूद के छोटे-छोटे टुकड़े करके, उन पर कालीमिर्च का चूर्ण और पिसा हुआ सेंधानमक छिड़ककर,नींबू का रस मिलाकर खाने से उन्माद ( पागलपन) रोग ठीक होता है।  
  • अमरूद के बीज अलग करके, उसको मिस्की में पीसकर गुलाबजलब और मिश्री मिलाकर सेवन करने से पित्त की विकृति का निवारण होता है।  
  • अमरूद के ताजे पत्तों को जल से धोकर, कूटकर उस पर ३० ग्राम रस पिलाने से भांग का नशा छूमंतर होता है।  
  • अमरूद के ताजे व कोमल पत्तों का रस २० ग्राम मात्रा में लेकर उसमे शर्करा मिलाकर दिन में दो बार सेवन करने से अजीर्ण की विकृति दूर होती है।  
  • अमरूदों में विटामिन 'सी' की अधिक मात्रा होती है।  प्रतिदिन अमरुद खाने से दांतो की सुरक्षा होती है और ह्रदय को बहुत लाभ होता है।  अमरूद से शरीर को शक्ति व स्फूर्ति मिलती है।  

नाशपाती 

  • शरीर में रक्त की कमी होने पर प्रतिदिन नाशपाती खाने व रस पीने से रक्त की वृद्धि होती है और रक्ताल्पता की विकृति नष्ट होती है। 
  • प्रतिदिन नाशपाती का मुरब्बा खाने से ह्रदय की निर्बलता नष्ट होती है और मस्तिष्क को शक्ति मिलने से स्मरण शक्ति बढती है। 
  • नाशपाती खाने से व रस पीने से कुछ सप्ताह में त्वचा की शुष्कता नष्ट होती है।  शुष्क त्वचा अधिक कोमल और स्निग्ध बनती है। 
  • छात्रों को प्रतिदिन नाशपाती खाने से व रस पीने से स्मरण शक्ति विक्सित होती है।  मस्तिष्क का कार्य करने वालो की मस्तिष्क शक्ति बढती है।  
  • भोजन के प्रति अरुचि होने व भूख नहीं लगने पर नाशपाती को छीलकर , उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके उस पर भुने हुए जीरे का चूर्ण , काली मिर्च का चूर्ण , सेंधा नमक और नींबू का रस मिलाकर खाने से अरुचि नष्ट होती है और तीव्र भूख लगती है।  
  • ग्रीष्म ऋतु में उष्णता के कारण जब मूत्र त्याग में अवरोध व् जलन होने लगे तो नाशपाती का २०० ग्राम सेवन करने से अवरोध व् जलन दूर होती है।  
  • गर्भावस्था में योनि से रक्तस्राव होने पर नाशपाती का रस सुबह-शाम सेवन करने से रक्त स्राव बंद होता है।  
  • नपुंसकता की विकृति होने पर प्रतिदिन नाशपाती खाने से व रस पीने से बहुत लाभ होता है।  नपुंसकता मिटती है। 

अनन्नास 

  • प्रतिदिन अनन्नास खाने व रस पीने से मोटापे की विकृति दूर होती है। 
  • अनन्नास को छीलकर उसके छोटे-छोटे टुकड़े करके उन पर कालीमिर्च का चूर्ण छिड़ककर खाने से अम्लपित्त की विकृति ठीक होती है। 
  • अनन्नास खाने से रस पिने से शरीर में रक्त की वृद्धि होती है और पाचन क्रिया प्रबल होती है।  
  • अनन्नास का रोग डिप्थीरिया रोग के जीवाणुओं को नष्ट करता है।  
  • अनन्नास खाने व रस सेवन करने से ग्रीष्म ऋतु में मूत्र का अवरोध व जलन नष्ट होती है।  अनन्नास का रस पीने से बच्चो के पेट के कीड़े नष्ट हो जाते है। 
  • अनन्नास का रस पिने से शरीर का शोथ नष्ट हो जाता है। 
  • अनन्नास का सेवन से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। 
  • आँखों के आसपास शोथ होने के पर अनन्नास खाने व रस पीने से शोथ दूर होती है। 

टमाटर 

  • स्त्रियाँ चेहरे की खूबसूरती के लिए ब्यूटीपार्लर में जाकर सैकड़ो रुपये खर्च करती है लेकिन प्राकृतिप खूबसूरती नहीं मिलती।  प्रतिदिन टमाटर खाने से और टमाटर का रस चेहरे और गर्दन पर मलने से त्वचा का सौंदर्य निखरता है।  
  • आयु के बढ़ने के साथ आँखों के नीचे काले निशान बनने लगते है।  ऐसे में टमाटर का रस और गाजर का रस मिलाकर मलने से काले निशान मिटते है।  
  • टमाटर के १०० ग्राम रस में या टमाटर के छोटे-छोटे टुकड़े बनाकर उस पर कालीमिर्च और इलायची के दानो का चूर्ण छिड़ककर खाने से वमन दूर होती है। 
  • टमाटर के १०० ग्राम रस में मधु और थोड़ा सा जल मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कुछ दिनों में रक्तपित्त रोग की विकृति में आराम होता है। 
  • टमाटर खाने से व् रस पीने से गर्भावस्था में स्त्रियों की शारीरिक निर्बलता नष्ट होती है।  वमन विकृति भी दूर होती है। 
  • टमाटर में विटामिन ' ए ' पर्याप्त मात्रा में होता है।  प्रतिदिन टमाटर खाने व रस पीने से रतौंधी की विकृति नष्ट होती है। विटामिन ए  नेत्र ज्योति को प्रबल करता है। 

गाजर 

  • अनिद्रा रोग होने पर जब कोई स्त्री पुरुष रात को सो नहीं पाता हो तो रात को बिस्तर पर जाने से आधे घंटे पहले गाजर का २०० ग्राम रस पीने से अनिद्रा रोग का निवारण होता है।  
  • ग्रीष्म ऋतु में उष्णता से पीड़ित होने वाले स्त्री-पुरुष , किशोर व प्रौढ़ गाजरों के १०० ग्राम रस में अंगूरों का रस और चीनी मिलाकर , मिक्सी में मिश्रण बनाए।  इस मिश्रण में सोडा और बर्फ मिलाकर सेवन करने से बहुत ठण्डक मिलती है। 
  • प्रतिआदीन गाजर का रस पीने से नेत्र ज्योति प्रबल होती है।  गाजरों में विटामिन - ए होता है जो नेत्रज्योति बढ़ाता है। 
  • अपेंडिसाइटिस अर्थात आंत्रपुच्छ शोथ में गाजर का रस प्रतिदिन सेवन करने से शूल में आराम होता है।  
  • शिशु को गाजर का रस पिलाने से उसके दांत सरलता से निकलते है।  गाजर के रस में कैल्शियम होता है जो दांतो को मजबूत बनाता है।  
  • गाजर के ताजे, कोमल पत्तो पर शुद्ध घी लगाकर आग पर हलका - सा गर्म करके, उन पत्तो को मसलकर बूंद - बूंद रस नामक में टपकाने से आधा सीसी का भयंकर दर्द दूर होता है।  
  • शिशु को जन्म देने के बाद स्त्रियाँ गाजर के रस का सेवन करती है तो उनके स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।  
  • गाजर के २०० ग्राम रस में पालक का ५० ग्राम रस मिलाकर प्रतिदिन सेवन करने से कुछ सप्ताह में नेत्रज्योति प्रबल होती है।  

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